-10%Charles Chaplin, Tr. Suraj Prakash
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इस नायाब और मुश्किल शख़्स के बारे में काफ़ी कुछ बताती है यह किताब...एक अनूठा जीवन्त चित्रण। —द न्यूयॉर्क टाइम्स अपने घर के सामने से गुज़रते हुए वाडेविल के सजे-धजे अभिनेता सितारों को देखकर चार्ली चैप्लिन चकित भी होते और प्रेरित भी। तब उनकी उम्र बहुत कम थी। लेकिन उस समय उनके दिल में अभिनेता बनने की जो चाह पैदा हुई, वह ताउम्र बनी रही। यह उनकी आत्मकथा है। दुनिया-भर में ‘लिटिल ट्रैम्प’ के रूप में विख्यात चार्ली चैप्लिन के जीवन के कई अन्य पहलू भी इसमें उजागर हुए हैं। दक्षिण लंदन की झुग्गियों में घोर ग़रीबी में बीता बचपन, माता-पिता के तनावपूर्ण सम्बन्ध, फिर संगीत हॉल के मंच पर अभिनय की शुरुआत, अमेरिका में मिला वह शानदार ब्रेक, अपने काम पर अपना नियंत्रण बनाए रखने का कलागत संघर्ष, एक के बाद एक असफल विवाहों का संताप, वामपंथी राजनीति और व्यक्तिगत आरोपों के चलते हॉलीवुड से निर्वासन... यह पुस्तक उनके जीवन के हर पड़ाव के बारे में बताती है; वे कैसे सोचते थे, कैसे फ़ैसले लेते थे, यह भी। अपने समय की राजनीति, और उस समय के महान नेताओं के बारे में उनके क्या विचार थे, उनके समकालीन व्यक्तित्वों से उनकी मुलाक़ातें जिनमें बर्नार्ड शॉ, आइंस्टीन और गांधी जी भी शामिल हैं, यह सभी कुछ इसमें है। बीसवीं सदी के सर्वाधिक उल्लेखनीय व्यक्तित्वों में से एक चार्ली चैप्लिन की अपनी कहानी, उनके अपने शब्दों में।
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K.J.S. Dhillon